श्री गणपति पूजनम् गणेश आवाहनम् आचार्य निम्न मन्त्रों का उच्चारण करते हुए गणेश व अम्बा का आवाहन यजमान से करावें- ॐ गणानां त्वा गणपतिर्व० हवामहे प्रियाणां त्वा प्रियपतिर्ठ० हवामहे निधीनां त्वां निधिपतिर्ठ० हवामहे वसो मम। आहमजानि गर्भ धमा त्वमजासि गर…

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॥ शिवपूजनम् ॥ षडङ्गन्यासः विनियोगः मनो जूतिरित्यस्य आङ्गिरसो बृहस्पतिऋषिः, यजुश्छन्दः, विश्वेदेवा देवता हृदये न्यासे विनियोगः । ॐ मनो जूतिर्जुषतामाज्यस्य बृहस्पतिर्य्यज्ञमिमं तनोत्वरिष्टं व्यज्ञर्ठ० समिमं दधातु। विश्वेदेवास इह मादयन्तामों ३ प्र…

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वैदिक स्वस्तिपुण्याहवाचनम् वैदिक स्वस्तिपुण्याहवाचनम् वैदिक कर्मकाण्ड का अत्यन्त महत्वपूर्ण अंग है। इसके द्वारा यजमान आचार्य एवं ब्राह्मणों से दीर्घायु, पुण्य, आरोग्य एवं ऐश्वर्य की कामना करता है। दोनों घुटनों को पृथ्वी पर मोड़ कर कमल के तुल्य अपन…

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अथ देव्याः कवचम् देव्याः कवचम् देवी दुर्गा की उपासना का अत्यन्त शक्तिशाली रक्षात्मक स्तोत्र है, जो मार्कण्डेय पुराण एवं श्रीदुर्गासप्तशती का प्रमुख अंग है। इसके पाठ से भय, रोग, शत्रु बाधा और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है। देव्याः कवचम् मार्…

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देवताओं के यज्ञ विचार रूद्रयाग रूद्रयाग तीन प्रकार का होता है-रुद्र, महारुद्र और अतिरुद्र । रुद्रयाग ५,७ अथवा ९ दिन में होता है। महारुद्र याग ९ दिन में अथवा ११ दिन में होता है। अतिरूद्रयाग ९ दिन में अथवा ११ दिन में होता है। रूद्रयाग में १६ अथवा २१ …

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॥ शिव पार्थिव-पूजन विधि ॥ शिव पार्थिव-पूजन भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करने की अत्यन्त प्रभावशाली वैदिक विधि है। इस पूजन से पाप क्षय, आयु, आरोग्य, धन-धान्य तथा मनोकामना की पूर्ति होती है। पूजन प्रारम्भ विधि हाथ में अक्षत एवं पुष्प लेकर स्वस्त्य…

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🌺 श्री स्वामी परमहंस जी महराज का संक्षिप्त इतिहास 🌺 हमारा देश संसार की वह पावन भूमि है जहाँ अतीतकाल से ऐसे नर-नारी जन्म लेते आये हैं, जो अपने त्याग, तपस्या, वीरता और सेवा से देवताओं के समान उच्च हो गये हैं । उन्हीं में से हमारे परम श्रद्धेय स्वामी श्र…

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