श्री गणेशाय नमः
वर पक्ष वैवाहिक गोत्रोच्चार शाखोच्चार पाठ
अर्थ = सर्व प्रथम कोई वेद मन्त्र तथा मङ्गल श्लोक से शुभारम्भ करें ।छन्द
श्री गणेश मनाइके शाखा करूँ बखान ।वर कन्या चिन्ञ्जीवी कृपा करें भगवान् ।।
कुलगुरू व आचार्यगण पढ़ते शाखोच्चार ।
वर कन्या चिरन्ञ्जीवी अनुपम आशीर्वाद ।।
पाँच देव रक्षा करें विनती कृपा निधान ।
वर कन्या चिरन्ञ्जीवी कृपा करों भगवान् ।।
श्लोक
जय गणनायक सिद्धि विनायक , मङ्गलदायक बुद्धि प्रदाता ।हो तुमही सबके शुभदायक , कष्ट हरों हे भाग्य विधाता ।।
रिद्धि व सिद्धि के स्वामी तुम्हीं हो , पिता शुभ लाभ के हो भवत्राता ।
साथ में माँ गौरी के आओ , तुम्हे आज भक्त तुम्हारा बुलाता ।।
तव च का किल न स्तुतिरम्बिके सकलशब्दमयी किल ते तनुः ।
निखिलमूर्तिषु मे भवदन्वयो मनसिजासु बहिः प्रसरासु च ।।
इति विचिन्त्य शिवे शमिताशिवे जगति जातमयत्नवशादिदम् ।
स्तुतिजपार्चनचिन्तनवर्जिता न खलु काचन कालकलास्ति मे ।।
।। शाखोच्चार पाठ ।।
ॐ स्वस्ति श्रीमन् नन्द नन्दन चरण कमल भक्ति अनुराग धर्ममूर्ति धर्मावतार श्री अग्रकुल कमल प्रकाश महतां मुकुट मणि सभा श्रृङ्गार सद्विद्या विनोदेन कृतकीर्ति विस्तारितस्य अस्यां रात्रौं अस्मिन् मण्डपाभ्यान्तरें स्वस्ति श्रीमद् विविध विद्या विचार चातुरी विनिर्जित सकल वादि व्रन्दोपरि विराजमान पद पदार्थ साहित्य रचनामृतायमान काव्य कौतुक चमत्कार परिणत निसर्ग सुन्दर सारस्वत सहजानुभाव गुणनिकर गुम्भितयशः सुरभीकृत मङ्गल मण्डपस्य स्वस्ति श्रीमतः शुक्ल यजुर्वेदान्तर्गत वाजसनेय माध्यान्दिनी शाखाध्यायिनः कात्यायन सूत्रस्य ……..गोत्रस्य परम पूज्य प्रपितामह श्रीमत्…………..महोदयस्य प्रपौत्रः ।। कात्यायन सूत्रस्य……..गोत्रस्य परम पूज्यपितामह श्रीमत् ………….महोदयस्य पौत्रः ।। कात्यायन सूत्रस्य……. गोत्रस्य परम पूज्यपिता श्रीमत् ………….महोदयस्य पुत्रः प्रयतपाणि शरणं प्रपद्ये स्वस्ति संवादेषु भयोर्वृद्धिः वरकन्यामङ्गलमास्ताम् वरश्चिरजीवी भवतात् कन्या च सावित्री भूयात् । इति वर पक्षे प्रथमोशाखोच्चारः ।।अर्थ = इसे तीन (3) बार पढ़ना है जिससे पितृ देव का कन्या एवं वर को आशीर्वाद प्राप्त हो। आज इस मङ्गल बेला में पूज्यचरण श्रीमान् जी अपने लाड़ले परपोते को आशीर्वाद दें, पूज्य श्रीमान् जी अपने लाड़ले पोते को आशीष प्रदान करें, एवं आदरणीय श्रीमान् जी अपने प्रिय पुत्र को आशीर्वाद दें ।।


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