मंत्र और संकल्प विधि - sankalp

AnandShastri
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विशेष संकल्प:दृढ़ संकल्प मंत्र –

रुद्राभिषेक पूजा में संकल्प सबसे पहला और अत्यंत महत्वपूर्ण चरण होता है। संकल्प का अर्थ होता है — अपने मन, वचन और कर्म से किसी विशेष उद्देश्य के लिए भगवान शिव की पूजा करने का दृढ़ निश्चय करना । जब साधक संकल्प करता है, तो वह भगवान शिव के सामने अपना परिचय, स्थान, समय (तिथि, वार, नक्षत्र आदि) और पूजा करने का उद्देश्य स्पष्ट रूप से व्यक्त करता है। इससे पूजा अधिक प्रभावशाली और फलदायी मानी जाती है।

ॐ स्वस्ति श्री समस्तजगदुत्पत्तिस्थित-लयकारणस्य रक्षा-शिक्षा-विचक्षणस्य प्रणत- पारिजातस्य अशेषपराक्रमस्य श्रीमदनन्तवीर्यस्यादि नारायण अचिन्त्यापरिमितशक्त्या ध्रियमाणानां महाजलौघमध्ये परिभ्रमताम् अनेककोटि ब्रह्माडानाम् एकतमे अव्यक्तमहदहंकार – पृथिव्यप्तेजो वाय्वाकाशाद्यावरणैरावृते अस्मिन् महति ब्रह्माडखण्डे आधारशक्तिश्रीमदादि - वराह – दृंष्ट्राग्रविराजिते कूर्मानन्त – वासुकि - तक्षक – कुलिक कर्कोटकपद्म – महापद्म – शंखाद्यष्ट महानागैर्ध्रियमाणे ऐरावत – पुण्डरीक – वामन – कुमुदाञ्जन – पुष्पदन्त – सार्वभौम – सुप्रतीकाष्टदिग्गजोपरिप्रतिष्ठितानाम् अतल – वितल – सुतल – तलातल – रसातल – महातल – पाताल – लोकानामुपरिभागे पुण्यकृन्निवासभूत – भूलोक – भुवर्लोक – स्वर्गलोक महर्लोक – जनोलोक – परलोक – सत्य लोकाख्य सप्तलोकानामधोभागे - चक्रवालशैल – महावलयनाग मध्यवर्तिनो महाकाल महाफणि - राजशेषस्य सहस्त्रफणा मणिमण्डलमण्डिते दिग्दन्तिशुण्डादण्डोद्दण्डिते अमरावत्य शोकवती भोगवती - सिद्धवती - गान्धर्ववती - काञ्ची अवन्त्यलकावती यशोवतीतिपुण्यपुरीप्रतिष्ठिते लोकालोका चलवलयिते लवणेक्षु-सुरा सर्पि - र्दधि - क्षीरोदकार्णवपरिवृते जम्बू - प्लक्ष – कुश – क्रौञ्च – शाक शाल्मलिपुष्कराख्य सप्तद्वीपयुते इन्द्र – कांस्य – ताम्र – गभस्ति - नाग – सौम्य – गन्धर्व – चारणभारतेतिनव – खण्डमण्डिते सुवर्णगिरि कर्णिकोपेत महासरोरूहा - कारपञ्चाशत् कोटियोजनविस्तीर्ण भूमण्डले अयोध्या मथुरा - माया - काशी - काञ्ची - अवन्तिकापुरी द्वारावतीतिमोक्षदायिकसप्तपुरीप्रतिष्ठते सुमेरू निषधत्रिकूट – रजतकूटाम्रकूट – चित्रकूट – हिमवद्विन्ध्याचलानां महापर्वत प्रतिष्ठिते हरिवर्षकिं पुरूषभारतवर्षयोश्च दक्षिणे नवसहस्त्रयोजन विस्तीर्णे मलयाचल – सह्याचल विन्ध्याचलानामुत्तरे स्वर्णप्रस्थ – चण्डप्रस्थ – चान्द्र - सूक्तावन्तक – रमणक – महारमणक – पाञ्चजन्य – सिंहल – लङ्केति - नवखण्डमण्डिते गंगा - भागीरथी - गोदावरी - क्षिप्रा - यमुना - सरस्वती - नर्मदा - ताप्ती - चन्द्रभागा - कावेरी - पयोष्णी - कृष्णा - वेण्या - भीमरथी - तुंगभद्रा - ताम्रपर्णी - विशालाक्षी - चर्मण्वती - वेत्रवती - कौशिकी - गण्डकी - विश्वामित्री सरयूकरतोया - ब्रह्मानन्दामहीत्यनेकपुण्यनदीविराजिते - दण्डक – विन्ध्यक – चम्पक – बदरिक – महीलांगुहेक्षुक – नैमिष – कदलिका - देवदार्वाख्यदशारण्ययुते भारतवर्षे - सकल देवतानां निवासभूमौ , वेदभूमौ

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