विष्णु आरती – ॐ जय जगदीश हरे
भगवान विष्णु पालनकर्ता और सृष्टि के रक्षक माने जाते हैं। विष्णु आरती “ॐ जय जगदीश हरे” भक्ति, श्रद्धा और समर्पण से की जाने वाली अत्यंत प्रसिद्ध आरती है। इसके नियमित पाठ से जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनाशे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी॥
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥
दीनबन्धु दुःखहर्ता, तुम रक्षक मेरे।
करुणा हस्त उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥


shastrianand701@gmail.com