Gayatri mata ki Aarti Sangrah

AnandShastri
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श्री गायत्री माता की आरती | Gayatri Mata Aarti in Hindi

🌼 श्री गायत्री माता की आरती 🌼

गायत्री माता वेदों की जननी और दिव्य बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी हैं। इनकी आरती करने से मन, बुद्धि और आत्मा शुद्ध होती है।


जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता ।
आदि शक्ति तुम, अलख निरञ्जन, जग पालन कर्त्री ।
दुःख शोक भय, क्लेश कलह, दारिद्र्य दैन्य हर्त्री ॥
ब्रह्म रूपिणी, प्रणतपालिनी, जगतधातृ अम्बे ।
भवभयहारी, जनहितकारी, सुखदा जगदम्बे ॥
भय हारिणी, भव तारिणी अनघे, अज आनन्द राशी ।
अविकारी, अघहरी, अविचलित, अमले, अविनाशी ॥
कामधेनु सतचित आनन्दा, जय गङ्गा गीता ।
सविता की शाश्वती शक्ति तुम, सावित्री सीता ॥
ऋग्, यजु, साम, अथर्व प्रणयिनी, प्रणव महामहिमे ।
कुण्डलिनी सहस्रार, सुषुम्ना शोभा गुण गरिमे ॥
स्वाहा, स्वधा, शची, ब्रह्माणी, राधा, रुद्राणी ।
जय सतरूपा वाणी, विद्या, कमला कल्याणी ॥
जननी हम हैं दीन हीन, दुःख दारिद के घेरे ।
यदपि कुटिल कपटी कपूत, तौ बालक हैं तेरे ॥
स्नेह सनी करुणामयि माता, चरण शरण दीजै ।
बिलख रहे हम शिशु सुत तेरे, दया दृष्टि कीजै ॥
काम क्रोध, मद लोभ दम्भ, दुर्भाव द्वेष हरिये ।
शुद्ध बुद्धि, निष्पाप हृदय, मन को पवित्र करिये ॥
तुम समर्थ सब भौति तारिणी, तुष्टि पुष्टि त्राता ।
सत मारग पर हमें चलाओ जो है सुखदाता ॥
जयति जय गायत्री माता । जयति जय गायत्री माता ॥

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❓ FAQ – गायत्री माता आरती

Q. गायत्री आरती कब करनी चाहिए?
प्रातःकाल या संध्या समय।

Q. क्या विद्यार्थी यह आरती कर सकते हैं?
हाँ, यह विशेष रूप से लाभदायक है।

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