देवताओं के यज्ञ विचार
रूद्रयाग
रूद्रयाग तीन प्रकार का होता है-रुद्र, महारुद्र और अतिरुद्र । रुद्रयाग ५,७ अथवा ९ दिन में होता है। महारुद्र याग ९ दिन में अथवा ११ दिन में होता है। अतिरूद्रयाग ९ दिन में अथवा ११ दिन में होता है। रूद्रयाग में १६ अथवा २१ विद्वान् होते हैं। महारूद्रयाग में ३१ अथवा ४१ विद्वान् होते हैं। अतिरूद्रयाग में ६१ अथवा ७१ विद्वान् होते हैं। रूद्रयाग में उन्नीस हजार नव सौ इक्कीस (१९९२१) आहुति होती है। महारूद्र में दो लाख उन्नीस हजार एक सौ इकतीस (२१९१३१) आहुति होती है। अतिरूद्रयाग में चौबीस लाख दस हजार चार सौ इकतालिस (२४१०४४१) आहुति होती है। लघु रूद्रयाग में हवन सामग्री ११ मन, महारूद्रयाग में २१ मन और अतिरूद्रयाग में ७० मन लगती है।
विष्णुयाग
विष्णुयाग तीन प्रकार का होता है— विष्णु, महाविष्णु और अतिविष्णु । विष्णुयाग ५, ७, ८ अथवा ९ दिन में होता है। महाविष्णुयाग ९ दिन में होता है। अतिविष्णुयाग ९ दिन में अथवा ११ दिन में होता है। विष्णुयाग में १६ अथवा २१ विद्वान् होते हैं। महाविष्णुयाग में ३१ अथवा ४१ विद्वान् होते हैं। अतिमहाविष्णुयाग में ६१ अथवा ७१ विद्वान् होते हैं। विष्णुयाग में हवनसामग्री ११ मन, महाविष्णुयाग में २१ मन और अतिविष्णुयाग में ५५ मन लगती है।
अनन्तदेवकृत विष्णुयाग पद्धति के अनुसार विष्णुयाग में सोलह हजार (१६०००) आहुति होती है । महाविष्णुयाग में एक लाख साठ हजार (१,६००००) आहुति होती है। अतिविष्णुयाग में तीन लाख बीस हजार (३,२००००) आहुति होती है।
नागरकृत विष्णुयाग पद्धति के अनुसार विष्णुयाग में एक लाख साठ हजार (१६००००) आहुति होती है। महाविष्णुयाग में तीन लाख बीस हजार (३,२००००) आहुति होती है। अतिविष्णुयाग में चार लाख अस्सी हजार (४८०,०००) आहुति होती है।
आधुनिक विद्वानों की मुद्रित विष्णुयाग पद्धति के अनुसार विष्णुयाग में सोलह हजार (१६०००) आहुति होती है। महाविष्णुयाग में एक लाख साठ हजार (१६००००) आहुति होती है। अतिविष्णुयाग में तीन लाख बीस हजार (३२००००) आहुति होती है।
हरिहर महायज्ञ
हरिहर महायज्ञ में हरि (विष्णु) और हर (शिव) इन दोनों का यज्ञ होता है। प्रातःकाल विष्णुयज्ञ और मध्याह्न में रूद्रयज्ञ होता है। विष्णुयज्ञ में 'पुरुषसूक्त' से आहुति होती है और रूद्रयज्ञ में 'रूद्रसूक्त' से आहुति होती है। हरिहर महायज्ञ में १६ अथवा २१ विद्वान् होते हैं। हरिहर महायज्ञ में विष्णुयज्ञ और रूद्रयज्ञ की तरह आहुति की संख्या कही गयी है। हरिहर याग में हवन सामग्री २५ मन लगती है। यह महायज्ञ ९ दिन अथवा ११ दिन में होता है।
रामयज्ञ
रामयज्ञ विष्णुयाग की तरह होता है। इसमें पुरुषसूक्त से अथवा 'ॐ रामाय नम:' इस षडक्षर मन्त्र से आहुति होती है। प्रतिदिन अथवा पूर्णाहुति के दिन (रामसहस्रनामावली) से हवन करना चाहिये। रामयज्ञ में १६ अथवा २१ विद्वान् होते हैं। इसमें हवनसामग्री १५ मन लगती है। यह यज्ञ ८ दिन में होता है। रामयज्ञ में एक लाख (१०००००) अथवा एक लाख साठ हजार (१६००००) आहुति होती है।
शिवशक्ति महायज्ञ
शिवशक्ति महायज्ञ में शिव (रूद्रयज्ञ) और शक्ति (दुर्गा) इन दोनों का यज्ञ होता है। शिवयज्ञ प्रात: काल और शक्तियज्ञ (दुर्गायज्ञ) मध्याह्न में होता है। शिवयज्ञ (रूद्रयज्ञ) में शुक्ल यजुर्वेद के पाँचवें सम्पूर्ण अध्याय से हवन होता है और शक्तियज्ञ (दुर्गायज्ञ) में सम्पूर्ण दुर्गा से हवन होता है। शिवयज्ञ और शक्तियज्ञ इन दोनों यज्ञों की आहुति की संख्या एक लाख पचीस हजार (१२५०००) कही गयी है। इसमें हवन-सामग्री १५ मन लगती है। शिवशक्ति महायज्ञ में २१ हवन करने वाले विद्वान् होते हैं। यह महायज्ञ ९ दिन अथवा ११ दिन में सुसम्पन्न होता है।
गणेशयज्ञ
गणेशयज्ञ में शुक्ल यजुर्वेद के ३३वें अध्याय के ६५वें मन्त्र से (७२) मन्त्र तक आठ मन्त्रों से आहुति होती है। प्रतिदिन अथवा पूर्णाहुति के दिन 'गणेशसहस्रनाम' से हवन करना चाहिए। गणेशयज्ञ में एक लाख (१०००००) आहुति होती है। इसमें १६ अथवा २१ विद्वान् होते हैं। गणेशयज्ञ में हवन-सामग्री १२ मन लगती है। यह यज्ञ ८ दिन में होता है।
दुर्गायज्ञ
दुर्गायज्ञ में 'दुर्गासप्तशती' के द्वारा हवन होता है। प्रतिदिन अथवा पूर्णाहुति के दिन 'दुर्गासहस्रनामावली' (देवीसहस्रनामावली) से हवन करना चाहिए। दुर्गायज्ञ में हवन करनेवाले ९ विद्वान् होते हैं। आचार्य, ब्रह्मा और द्वारपालादि सब मिलाकर १६ अथवा २१ विद्वान् होते हैं। यह यज्ञ ९ दिन में होता है। दुर्गायज्ञ में हवन सामग्री २० मन अथवा १५ मनं लगती है।
लक्ष्मीयज्ञ
लक्ष्मीयज्ञ में ऋक परिष्टोक्त 'श्रीसूक्त' से हवन होता है। प्रतिदिन अथवा यज्ञ की पूर्णाहुति के दिन 'लक्ष्मीसहस्रनामावली' से हवन करना चाहिए। लक्ष्मीयज्ञ में एक लक्ष (१०००००) आहुति होती है। इसमें हवन करनेवाले ११ अथवा १६ विद्वान् होते हैं। आचार्य और ब्रह्मा मिलाकर २१ विद्वान् होने चाहिए। यह यज्ञ ८ दिन में होता है। लक्ष्मीयज्ञ में हवन- सामग्री १५ मन लगती है।
लक्ष्मीनारायण महायज्ञ
लक्ष्मीनारायण महायज्ञ में लक्ष्मी और नारायण (विष्णु) इन दोनों का यज्ञ होता है। प्रातःकाल लक्ष्मी का यज्ञ और मध्याह्न में नारायण (विष्णु) का यज्ञ होता है। लक्ष्मीयज्ञ में ऋग्वेदपरिशिष्टोक्त 'श्रीसूक्त' से हवन होता है और नारायण यज्ञ में पुरुषसूक्त (शुक्ल यजुर्वेद के ३१वें अध्याय के प्रारम्भ के १६ मन्त्र) से हवन होता है। लक्ष्मीयज्ञ और नारायण यज्ञ इन दोनों की आहुति संख्या एक लाख साठ हजार (१६००००) अथवा सवा लाख (१२५०००) कही गई है। इसमें ५० मन हवन सामग्री लगती है। लक्ष्मीनारायण महायज्ञ में हवन करनेवाले ३१ विद्वान् होते हैं। यह महायज्ञ ८ दिन में अथवा ९ दिन में अथवा ११ दिन में सुसम्पन्न होता है।


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