दारिद्रय दहन स्तोत्रम् | Daridrya Dahan Stotram in Hindi (पाठ, अर्थ और लाभ)
दारिद्रय दहन स्तोत्रम् भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत प्रभावशाली और चमत्कारी स्तोत्र है। मान्यता है कि इसका श्रद्धा और विश्वास के साथ नियमित पाठ करने से दरिद्रता, आर्थिक संकट, ऋण बाधा और जीवन की अनेक समस्याएँ दूर होती हैं। यह स्तोत्र विशेष रूप से सोमवार, प्रदोष व्रत और महाशिवरात्रि के दिन पढ़ना अत्यंत शुभ माना जाता है।
दारिद्रय दहन स्तोत्रम् क्या है?
“दारिद्रय” का अर्थ है गरीबी या अभाव और “दहन” का अर्थ है नाश करना। इस प्रकार दारिद्रय दहन स्तोत्र वह स्तुति है जो दरिद्रता का नाश करने वाली मानी जाती है। यह स्तोत्र भगवान शिव की महिमा का वर्णन करता है और उनके कृपा आशीर्वाद से जीवन में समृद्धि लाने का मार्ग बताता है।
शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति श्रद्धा से इसका पाठ करता है, उसके जीवन से आर्थिक संकट, दुर्भाग्य और नकारात्मक ऊर्जा धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है।
दारिद्रय दहन स्तोत्र के लाभ
- आर्थिक संकट से मुक्ति मिलती है।
- कर्ज और धन की कमी से राहत मिलती है।
- घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
- मानसिक तनाव और भय कम होते हैं।
- भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
दारिद्रय दहन स्तोत्र पाठ विधि
प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
भगवान शिव के समक्ष दीपक और धूप जलाएँ।
शिवलिंग पर जल, दूध और बिल्वपत्र अर्पित करें।
शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
11, 21 या 108 बार जप विशेष फलदायक माना जाता है।
सोमवार, प्रदोष और महाशिवरात्रि के दिन इसका पाठ विशेष रूप से शुभ माना गया है।
विशेष महत्व
दारिद्रय दहन स्तोत्र का नियमित पाठ केवल आर्थिक समृद्धि ही नहीं देता, बल्कि मानसिक शांति, आत्मबल और आध्यात्मिक उन्नति भी प्रदान करता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया जप जीवन में चमत्कारी परिवर्तन ला सकता है।
निष्कर्ष
यदि आप जीवन में आर्थिक कठिनाइयों, ऋण, दरिद्रता या बाधाओं से परेशान हैं, तो श्रद्धा भाव से दारिद्रय दहन स्तोत्रम् का नियमित पाठ करें। भगवान शिव की कृपा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि अवश्य प्राप्त होगी।


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